गद्य खंड - पाठ 6: स्फीति में बारिश (संपूर्ण हल)
लेखक: कृष्णनाथ | NCERT Class 11 Hindi Solutions
1. कठिन शब्दार्थ (Word Meanings)
| अलंग्य: | जिसे लांघा न जा सके (Inaccessible)। |
| अट्टहास: | ज़ोर की हँसी। |
| तुषार: | बर्फ या पाला। |
| दुर्गाम्य: | जहाँ पहुँचना कठिन हो। |
| जिज्ञासा: | जानने की इच्छा। |
"स्फीति में बारिश एक सुखद संयोग है, क्योंकि यहाँ वर्षा बहुत कम होती है और यहाँ की धरती सूखी, ठंडी और वंध्या रहती है।"
2. महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Complete Q&A)
प्रश्न 1: इतिहास में स्फीति का वर्णन कम क्यों रहा है?
उत्तर: स्फीति का इतिहास में वर्णन कम होने का मुख्य कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह स्थान चारों ओर से ऊँचे और दुर्गम पहाड़ों से घिरा हुआ है, जहाँ पहुँचना अत्यंत कठिन है। संचार के साधनों का अभाव और साल के 8-9 महीने बर्फ से ढके रहने के कारण इसका संपर्क शेष दुनिया से कटा रहता है। इसलिए मानवीय दखल कम होने से इसका इतिहास भी संक्षिप्त रहा है।
प्रश्न 2: स्फीति के लोग जीवन-यापन के लिए किन कठिनाइयों का सामना करते हैं?
उत्तर: स्फीति के लोगों का जीवन बहुत कठिन है। यहाँ साल में केवल एक ही फसल (जौ, गेहूँ, मटर और सरसों) उगाई जा सकती है। यहाँ न तो फल होते हैं और न ही छायादार पेड़। लकड़ी की कमी के कारण घर गर्म रखना मुश्किल होता है। साल के अधिकांश समय भारी बर्फबारी के कारण लोग घरों में कैद रहते हैं और परिवहन पूरी तरह ठप हो जाता है।
प्रश्न 3: लेखक ने कालिदास के 'ऋतुसंहार' में वर्णित वर्षा ऋतु का वर्णन यहाँ क्यों नहीं किया?
उत्तर: कालिदास ने 'ऋतुसंहार' में वर्षा का जो विलासी और श्रृंगारिक वर्णन किया है, वह स्फीति की परिस्थिति पर लागू नहीं होता। स्फीति में वर्षा ऋतु का वह उमंग, हरियाली और खुशहाली वाला रूप नहीं दिखता जो अन्य मैदानी इलाकों में होता है। यहाँ बारिश होना एक दुर्लभ और सुखद घटना है, इसलिए लेखक ने किताबी वर्णन के बजाय यहाँ की वास्तविकता को प्राथमिकता दी।
प्रश्न 4: स्फीति में बारिश का होना एक 'सुखद संयोग' क्यों माना गया है?
उत्तर: स्फीति एक रेगिस्तानी और सूखा पहाड़ी इलाका है। यहाँ बादल कभी-कभार ही बरसते हैं। जब लेखक वहाँ ठहरे हुए थे, तब आधी रात को अचानक बारिश हुई। सुबह होने पर स्थानीय लोगों ने लेखक से कहा कि "आपकी यात्रा शुभ है क्योंकि आपके आने से स्फीति में बारिश हुई है।" वहाँ की सूखी धरती के लिए बारिश का आना किसी वरदान से कम नहीं था।
प्रश्न 5: 'माने' श्रेणियों का नाम बौद्धों के 'माने' मंत्र के नाम पर करने के पक्ष में लेखक ने क्या तर्क दिए हैं?
उत्तर: लेखक का तर्क है कि स्फीति के पहाड़ों में बौद्ध भिक्षुओं ने बहुत तपस्या की है और यहाँ 'ओं मणि पद्मे हुं' (माने मंत्र) का जाप करोड़ों बार हुआ है। इन श्रेणियों की उदासी और सन्नाटे को देखते हुए, लेखक का सुझाव है कि इनका नाम 'माने' श्रेणियों के नाम पर ही होना चाहिए, क्योंकि इस मंत्र का प्रभाव इन पहाड़ों के कण-कण में बसा है।