गद्य खंड - पाठ 4: विदाई-संभाषण (संपूर्ण हल)

लेखक: बालमुकुंद गुप्त | NCERT Class 11 Hindi Solutions

1. कठिन शब्दार्थ (Word Meanings)

संभाषण:मिलकर बातचीत करना।
विषाद:दुख या उदासी।
आततायी:अत्याचारी (Tyrant)।
पायमाल:नष्ट करना या पैरों तले कुचलना।
नासूर:पुराना घाव जो ठीक न हो।
"बिछड़न समय बड़ा करुणोत्पादक होता है।" — यह पाठ लॉर्ड कर्जन के अहंकार और उनके पतन पर करारा व्यंग्य है।

2. महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Complete Q&A)

प्रश्न 1: 'विदाई-संभाषण' पाठ में 'बिछड़न समय' को करुणोत्पादक क्यों कहा गया है?
उत्तर: बिछड़न समय को करुणोत्पादक इसलिए कहा गया है क्योंकि अलग होते समय मन में पुरानी कड़वाहट मिट जाती है और शांति छा जाती है। भारत की संस्कृति में तो पशु-पक्षी भी बिछड़ते समय उदास हो जाते हैं। लेखक का मानना है कि चाहे कोई कितना ही अत्याचारी क्यों न हो, विदाई के समय उसके प्रति भी मन में करुणा जाग उठती है।
प्रश्न 2: लॉर्ड कर्जन को इस्तीफा क्यों देना पड़ा?
उत्तर: लॉर्ड कर्जन ने एक फौजी अफसर को अपनी इच्छानुसार पद पर रखना चाहा, लेकिन ब्रिटिश सरकार (कौंसिल) ने उनकी बात नहीं मानी। इस विरोध के कारण कर्जन ने दबाव बनाने के लिए इस्तीफा दे दिया, लेकिन सरकार ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया और उन्हें वापस बुला लिया।
प्रश्न 3: 'कैसर' और 'ज़ार' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुए हैं और कर्जन की तुलना उनसे क्यों की गई है?
उत्तर: 'कैसर' जर्मनी के तानाशाह शासकों के लिए और 'ज़ार' रूस के निरंकुश शासकों के लिए प्रयुक्त हुआ है। कर्जन की तुलना उनसे इसलिए की गई है क्योंकि वे भी उन्हीं की तरह जिद्दी और तानाशाही प्रवृत्ति के थे। उन्होंने भारतीय जनता की इच्छाओं को पैरों तले रौंद दिया और अपनी मनमर्जी से शासन चलाया।
प्रश्न 4: लॉर्ड कर्जन के शासन काल में भारत की क्या स्थिति थी?
उत्तर: कर्जन के शासन में भारत की स्थिति बहुत दयनीय थी। उन्होंने शिक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता पर पाबंदी लगा दी थी। बंगाल का विभाजन करके उन्होंने भारतीयों की एकता को तोड़ने की कोशिश की। देश में अकाल और महामारी के समय भी वे शाही दरबार सजाने में व्यस्त थे, जिससे जनता में उनके प्रति भारी आक्रोश था।
प्रश्न 5: लेखक ने कर्जन को अंत में क्या नसीहत दी है?
उत्तर: लेखक कहते हैं कि जाते-जाते कर्जन को भारत की जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्हें स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने अपनी जिद्द के कारण इस देश का नुकसान किया। यदि वे ऐसा करते हैं, तो शायद भारतीय जनता उन्हें माफ कर दे, अन्यथा इतिहास उन्हें एक निष्ठुर शासक के रूप में ही याद रखेगा।